सिद्धार्थ तिवारी का जाना कांग्रेस से राहुल भइया का जाना जैसा

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सफेद शेर’ के परिवार का ‘पंजा’ से खत्म हो गया रिश्ता


रीवा। एक समय में कांग्रेस में यह नाम ही काफी थी। रीवा से ही वह प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाते थे। विंध्य में उन्हें सफेद शेर कहा जाता था। वह स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं। उनकी तीसरी पीढ़ी कांग्रेस की राजनीति कर रही थी। बुधवार को श्रीनिवास तिवारी के परिवार का रिश्ता कांग्रेस से टूट गया। उनके पोते सिद्धार्थ तिवारी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। सियासी जानकारों का कहना है कि सिद्धार्थ तिवारी का कांग्रेस से राहुल भइया का जाना जैसा है। उनके परिवार के लिए वर्षों से सब कुछ कांग्रेस ही रहा है।

दरअसल, सिद्धार्थ तिवारी रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। पार्टी की पहली सूची आई तो उनका पत्ता कट गया था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि सिद्धार्थ तिवारी कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। बुधवार को भोपाल आकर उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान के समक्ष बीजेपी की सदस्यता ले ली। इसके साथ ही कांग्रेस के वर्षों पुराना रिश्ता खत्म हो गया। अब अटकलें हैं कि सिद्धार्थ तिवारी को बीजेपी त्योंथर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती है।

राहुल गांधी का जाने जैसा यह
सिद्धार्थ तिवारी का बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। विंध्य की राजनीति को समझने वाले राजनीति विश्लेषक जयराम शुक्ल ने कहा कि सिद्धार्थ तिवारी का कांग्रेस से जाना राहुल भइया के जाने जैसा है। वह बड़े राजनैतिक घराने का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। विंध्य में एक समय में कांग्रेस के अंदर दो परिवारों का ही दबदबा रहा है। दो परिवारों का मतलब अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी से हैं। विंध्य इलाके में 20 फीसदी अधिक ब्राह्मणों का वोट है। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास तिवारी समाजवादी नेता थे।

उनका दबदबा ब्राह्मणों के साथ-साथ ओबीसी वर्ग में भी था। वह 1972 से पहले तक समाजवादी नेता थे। पहले सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े हुए थे। खास कर रीवा में उनकी अच्छी पकड़ थी। इस परिवार का अपना एक वजूद रहा है। इनके जाने से कांग्रेस की सेहत पर असर पड़ेगा। अगर इनके 50 फीसदी समर्थक भी पलट जाते हैं, कांग्रेस को बड़ा नुकसान होगा।

2018 के विधानसभा चुनाव में भी रीवा जिले में कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया था। रीवा में आठ विधानसभा की सीटें हैं। आठ पर बीजेपी का कब्जा है। वहीं, विंध्य बीजेपी का गढ़ रहा है। कांग्रेस इसमें सेंधमारी की कोशिश में जुटी है। लेकिन सिद्धार्थ तिवारी का जाना एक झटका है।

गौरतलब है कि विंध्य इलाके में श्रीनिवास तिवारी को सफेद शेर कहा जाता था। एक बार अर्जुन सिंह उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद उनके समर्थक एकजुट हो गए थे। साथ ही श्रीनिवास तिवारी अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर भी लड़ाई लड़ते रहे हैं। 1972 से तिवारी परिवार कांग्रेस के साथ था। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले हाथ का साथ छूट गया है।

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