आवश्यक जानकारी प्राइवेट हॉस्पिटल के बारे में – प्रदीप कुमार तिवारी

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जनहित में जारी भारत के सभी नागरिकों को यह जानकारी होते हुए भी इसको कैसा रोका जाए सोचने का विषय

रीवा प्रदीप कुमार तिवारी प्रदेश उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन अपनी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मीडिया को बताया कि जानकारी स्पष्ट है कि हम आप सभी परिवार में रिश्तेदारी में मित्रता में जरूर छोटी बड़ी बीमारियों से लोग त्रस्त हैं। बीमारी के चलते इलाज की आवश्यकता होती है हम आप सबको मालूम है और सरकारी अस्पतालों में दवाओ की व्यवस्था एवं उचित देख की व्यवस्था न होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति प्राइवेट अस्पताल की तरफ इलाज के लिए पहुंचता है।
जब इलाज शुरू होता है तो डॉक्टर साहब या व अस्पताल का समस्त स्टाफ का मरीज को लिखी गई दवाई उसी अस्पताल के मेडिकल स्टोर से लेने को ही कहा जाता है अन्यथा बाजार से दवाई लेने की स्वीकृति स्वतंत्रता प्रदान क्यों नहीं है क्या प्राइवेट हॉस्पिटल में दवाइयां अलग से आती है या प्राइवेट वालों का दवा एजेंसी अलग है उनके पास वह दवाई नहीं होती है इसका सीधा सभी साथी जानते हैं कि सीधा सा कारण है जो दवाई प्राइवेट मेडिकल जिस हॉस्पिटल में इलाज करा रहे है वहां पर कीमत कई गुना अधिक ली जाती है।और वाहर के मेडिकल पर उस दवा की कीमत काफी कम होती है।
इस व्यवस्था में सुधार हेतु श्रीमान कलेक्टर महोदय श्रीमान कमिश्नर महोदय और शासन को यह जानकारी दी जावे की प्राइवेट अस्पताल वालों को इलाज के दौरान मरीज बाहर से भी दवा ला सकता है। उसको बाहर से दवा लाने से न रोका जाए। अगर रोका जाता है तो यह अपराध की श्रेणी में शामिल होना चाहिए लेकिन प्राइवेट अस्पताल वाले मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाना पूरी तरह जानते हैं इसलिए दबाव बनाकर अपने अस्पताल के मेडिकल स्टोर से ही दवाई के लिए सभी मरीजों को प्रेरित करते हैं मजबूरी में मरीज के परिजन दवाई भी खरीदते हैं लेकिन मन में यह बात जरूर उठती है कि ऐसा गलत हो रहा है लेकिन अपने मरीज की जान बचाने के लिए सब करना पड़ता है जो कि यह दबाव में होता है अगर सरकारी अस्पतालों में सुचारू रूप से राज्य सरकार द्वारा पूरी व्यवस्था की जाए तो प्राइवेट अस्पतालों का जो यह लूट खसोट है पूरी तरह से बंद हो जाए

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