केपी को लेकर दुविधा में फंसी भाजपा, लोकप्रियता को दरकिनार करना आसान नहीं

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✍️ निखिल पाठक चीफ एडिटर NVJ समाचार ✍️

लोगों ने के पी को माना सेमरिया का दूसरा बसामन मामा

लंबे समय से सुर्खियों में रहे सेमरिया के भाजपा विधायक के पी त्रिपाठी को लेकर भाजपा दुविधा में फंसी नजर आ रही है। इस बीच तरह-तरह की चर्चाएं रही , कि के पी त्रिपाठी की टिकट कट सकती है और किसी अन्य या अभय मिश्रा की पत्नी को टिकट दी जा सकती है। किंतु के पी द्वारा क्षेत्र में कराए गए कार्यों , उनकी सक्रियता और लोकप्रियता को भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दर किनार नहीं कर पा रहा है। ऐसी स्थिति में सेमरिया की टिकट को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।गौरतलब है कि अपनी दबंग छवि और क्षेत्र में सक्रियता, लोकप्रियता और सेमरिया में कराए गए विकास कार्यों को पार्टी दरकिनार नहीं कर पा रही है। बीते दिनों पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के समक्ष के पी त्रिपाठी ने जिस तरह से लाखों का जन सैलाब एकत्रित किया था ,उससे भी पार्टी यह समझ गई है कि के पी को दरकिनार करना आसान नहीं है। वही दूसरी ओर शराब व्यवसायी और गुंडा की इमेज रखने वाले दल बदलू नेता की पत्नी को भी टिकट मिलने की चर्चाएं रही किंतु पार्टी मौका परस्त एवं दल बदलू नेताओं पर भरोसा नहीं कर रही है। क्योंकि भाजपा को पता है कि ऐसे लोग सिर्फ टिकट के लिए आए हैं, गौरतलब है कि उक्त नेता भाजपा से विधायक बनने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे और कांग्रेस नेताओं द्वारा जबरदस्त घेराबंदी करने के कारण टिकट ना मिलती देख पुनः भाजपा की शरण में चले गए। उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा उनकी गुंडा छवि और शराब माफिया के आगे नतमस्तक हो जाएगी,किंतु उक्त नेता को क्षेत्र में कार्यकर्ता ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। जिस कारण भी भाजपा को पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और देर सबेर के पी त्रिपाठी को ही भाजपा अपना प्रत्याशी बनाएगी।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में दो बार के चुनाव हारे भगत शुक्ला के अलावा विधानसभा के पूर्व सचिव सत्यनारायण चतुर्वेदी , प्रदेश नेता विमलेंद्र तिवारी के भाई धर्मेंद्र तिवारी बबुल , प्रदीप सोहगौरा,पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुबोध पांडेय, दिवाकर द्विवेदी सहित आधा दर्जन नेता टिकट की दौड़ मे हैं, किंतु इनमें से कोई भी के पी त्रिपाठी की लोकप्रियता के आगे टिक सकेगा ,इसमें पार्टी को संदेह है। भगत शुक्ला दो बार चुनाव हार चुके हैं और पिछले 5 वर्ष में क्षेत्र में उनकी सक्रियता शून्य रही है, वहीं दूसरी ओर सत्यनारायण चतुर्वेदी क्षेत्र में आते-जाते रहे हैं,किंतु उनके पास स्थानीय कार्यकर्ताओं का अभाव है। धर्मेंद्र तिवारी बबुल अजय सिंह राहुल के दम पर टिकट लेना चाह रहे हैं, जबकि प्रदीप सोहगौरा के लिए पिछले चुनाव में बगावत का ऑडियो घातक साबित हो रहा है।जबकि युवा तुर्क माने जाने वाले छात्र नेता पार्टी की उपेक्षा से नाराज होकर घर बैठ गये हैं। ऐसी स्थिति में जहाँ कॉंग्रेस को सशक्त उम्मीदवार की तलाश है तो भाजपा पुनः के पी त्रिपाठी पर ही दांव लगा सकती है। जबकि बसपा के पंकज पटेल अपने स्वजातीय वोटों के सहारे एक बार पुनः मैदान में हैं।

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