धान खरीदी केन्द्र दुआरी में किसानों से लूट, तौलाई के नाम पर हो रही अवैध वसूली

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धान खरीदी केन्द्र दुआरी में किसानों से लूट, तौलाई के नाम पर हो रही अवैध वसूली


धान खरीदी केंद्र में रखे गए हैं दसों दलाल, दलालों के माध्यम से किसानों से 07 रुपए बोरी तौल के नाम से लिया जा रहा है।

पीड़ित किसान एकजुट होकर पहुंचेंगे कलेक्ट्रेट रीवा, कलेक्टर से लगाएंगे गुहार

✍️ निखिल पाठक रीवा ✍️

रीवा-गुढ़ -:
रीवा जिले के ज्यादातर धान खरीदी केंद्रों में समर्थन मूल्य पर धान बेचने आए किसानों से अवैध वसूली का मामला प्रतिवर्ष सुनने व देखने को मिलता है किंतु अवैध वसूली की सारी हदों को पार करते हुए किसानो की जेब में चुम्बक की तरह चिपककर वसूली करने का बड़ा मामला पहली बार पीड़ित किसानों की मुंहजुबानी सुनने को मिला।
जी हां,हम बात कर रहे हैं रीवा जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत इटार पहाड़ में संचालित धान खरीदी केंद्र दुआरी की जहां पर खरीदी केंद्र में लगभग दसों दलाल रखें गए हैं तथा उन्हीं दलालों के माध्यम से किसानों को लूटा-खसूटा जा रहा है यानि दिन-दहाड़े किसानों की जेब में डकैती डाली जा रही है और बेवस व लाचार किसान खुलेआम लुटने को मजबूर हैं क्योंकि यदि वो पैसा नहीं देगा तो उसके धान की तौल ही नहीं होगी , ये मैं नहीं बोल रहा हूं बल्कि एक पीड़ित किसान की मुंहजुबानी बात अपने कलम के माध्यम से लिख रहा हूं।
खबर में नाम न छापने की शर्त पर एक पीड़ित किसान ने बताया कि धान खरीदी केंद्र दुआरी में मजदूरी एवं तौलाई के नाम पर किसानों से 07/- रुपए प्रति बोरी के हिसाब से पैसा लिया जा रहा है। पीड़ित किसान ने बताया कि इस खरीदी केंद्र में ज्यादातर ब्यापारियों की धान खरीदी जा रही है और ब्यापारियों से अच्छी सांठगांठ बनाकर मोटी कमाई की जा रही है। पीड़ित किसान ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन के नियमानुसार शाम 06:00 बजे के बाद नाप-तौल वर्जित है किंतु धान खरीदी केंद्र दुआरी में ज्यादातर रात में ही ट्रैक्टर लोड़ धान आती है और पूरा खेल रात में ही होता है। पीड़ित किसान ने बताया कि धान खरीदी केंद्र में पाले गए दलालों के माध्यम से हम किसानों को काफी परेशान किया जा रहा है। पीड़ित किसान ने कहा कि हम सब किसान एकजुट होकर कलेक्ट्रेट रीवा पहुंचेंगे तथा न्याय की गुहार लगाते हुए उक्त समिति की जांच का आवेदन देगें ताकि अन्य किसान लुटने से बच सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार धान खरीदी केन्द्रों में किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने पहले ही ऐसे नियम बना रखे हैं कि किसानों को किसी भी तरह का नुकसान या असुविधा ना हो इसके लिए भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। आपको बता दें कि लगभग 11:00 रुपए प्रति क्विंटल की दर से समिति को भुगतान किया जाता है जिसमें कुल खरीदी पर दो रुपए प्रति क्विंटल की दर से समिति को साफ-सफाई एवं व्यवस्था के लिए दिया जाता है तथा शेष 09:00 रुपए में समिति मजदूरी भुगतान से लेकर अन्य व्यवस्था करती है जिसमें धान की तौलाई एवं स्टैकिंग भी शामिल है,इसके बावजूद भी किसानों को दलालों के माध्यम से लूटा जा रहा है। सबसे अहम व आश्चर्यजनक बात यह है कि पीड़ित किसान लगातार सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से अपनी ब्यथा शासन-प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं इसके बावजूद भी किसी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगी और न ही कोई वरिष्ठ व जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच करने पहुंचा।
*✍️ निखिल पाठक रीवा ✍️*

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